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नवजात बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की देखà¤à¤¾à¤² कैसे करे ?
नवजात शिशॠकी देखà¤à¤¾à¤² का सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ समय मां के गरà¥à¤ के दौरान होता है। गरà¥à¤ के दौरान यदि मां सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ है, उसका खानपान उचित हो और गरà¥à¤ से संबंधित कोई विकार ना हो तो बचà¥à¤šà¤¾ जनà¥à¤® के समय सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहता है। चीनी लोगों का मानना है कि जनà¥à¤® के समय बचà¥à¤šà¥‡ की उमà¥à¤° नव महीने की होती है जबकि हम जनà¥à¤®à¤¦à¤¿à¤¨ बचà¥à¤šà¥‡ के पैदा होने के वकà¥à¤¤ मनाते हैं। इसका मतलब यह है कि संबंध बनाने (कंसेपà¥à¤¶à¤¨) के पहले दिन से ही बचà¥à¤šà¥‡ का जीवन शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है और तà¤à¥€ से उसका पूरा-पूरा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखने की जरूरत होती है। इस दौरान की गई देखà¤à¤¾à¤² से ही शिशॠजनà¥à¤® के समय सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ होगा। इसी तरह इस दौरान बरती गई लापरवाही का नतीजा à¤à¥€ जनà¥à¤® के समय पर आने वाली जटिलताओं के रूप में सामने आता है।
नवजात शिशॠकी देखà¤à¤¾à¤² के लिठमां को समà¥à¤šà¤¿à¤¤ जानकारी मेडिकल व पेरामेडिकल सà¥à¤Ÿà¤¾à¤« दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दी जानी चाहिà¤à¥¤
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी पà¥à¤²à¤¾à¤¨ करने के पहले ही माता का समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ परीकà¥à¤·à¤£ करना चाहिठजिससे खून / कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की कमी, थीरोइड, हेपेटाइटिस, डायबिटीज, हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° आदि बीमारी होने पर उसका पता पहले से चल जाये और उचित उपचार शà¥à¤°à¥‚ हो सके।
जहां तक संà¤à¤µ हो सके पà¥à¤°à¤¸à¤µ हमेशा अचà¥à¤›à¥‡ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में ही होना चाहिठताकि चिकितà¥à¤¸à¤• और नरà¥à¤¸ की सेवाà¤à¤‚ मिल सके इससे जटिलताओं की आशंका कम हो जाती है।
किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार की जटिलता पेश आने पर असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में तà¥à¤°à¤‚त उससे निपटने की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की जा सकती है।
जनà¥à¤® के बाद शिशॠकी देखà¤à¤¾à¤² कैसे करे ?
शिशॠका जनà¥à¤® होते ही उसकी ठीक से देखà¤à¤¾à¤² होना आवशà¥à¤¯à¤• हैं। शिशॠकी कà¥à¤¯à¤¾ देखà¤à¤¾à¤² करनी छाईठइसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :
जनà¥à¤® के आधे घंटे के अंदर बचà¥à¤šà¥‡ को मां का दूध पिलाना चाहिà¤à¥¤ माता का पहला पिला दूध शिशॠको अवशà¥à¤¯ पिलाये इसमें कई बिमारियों से लड़ने की शकà¥à¤¤à¤¿ होती हैं।
जीवन के पहले 6 महीने तक बचà¥à¤šà¥‡ के लिठमां का दूध ही संपूरà¥à¤£ आहार है। इस दौरान मां के दूध के अलावा कोई à¤à¥€ चीज ना पिलाये।
कई लोग बचà¥à¤šà¥‡ को पानी, घà¥à¤Ÿà¥€, शहद, नारियल पानी, सोना को घिसकर या गंगा जल पिलाने की गलती करते हैं। à¤à¤¸à¤¾ नहीं करना चाहिà¤à¥¤
शà¥à¤°à¥‚आती 6 महीनों तक माता का दूध पीने वाले बचà¥à¤šà¥‡ अचà¥à¤›à¥€ तरह से विकसित होते हैं। संकà¥à¤°à¤®à¤£ से उनका बचाव होता है। साथ ही उन में अपने माता-पिता के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• लगाव लंबे समय तक बना रहता है।
छह महीने की उमà¥à¤° के बाद बचà¥à¤šà¥‡ को माता के दूध के अलावा ऊपरी आहार à¤à¥€ देना चाहिà¤à¥¤
जनà¥à¤® के तà¥à¤°à¤‚त बाद शिशॠको पोलियो की दवा, बीसीजी और हेपेटाइटिस का टीका देना चाहिà¤à¥¤
शिशॠको ठंड से बचाने के लिठउसे पूरे कपड़े पहनाने चाहिà¤à¥¤
कपड़ों के साथ ही उसे टोपी, बगà¥à¤²à¥‰à¤µà¥à¤¸ और मोज़े पहना कर रखना चाहिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‡ को मां के समीप रखना चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मां के शरीर से बचà¥à¤šà¥‡ को गरà¥à¤®à¥€ मिलती है।
घर की किसी बड़े सदसà¥à¤¯ को कोई संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• बीमारी होने पर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बचà¥à¤šà¥‹ से दूर रखे।
बचà¥à¤šà¥‡ को उठाते या खिलाने-पिलाने से पहले अपने हाथ अचà¥à¤›à¥‡ से साफ़ करे और सà¥à¤µà¤šà¥à¤› बरà¥à¤¤à¤¨ का ही इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करे।
बचà¥à¤šà¥‹ को उठाते समय उनके सिर को सहारा अवशà¥à¤¯ देना चाहिà¤à¥¤ छोटे बचà¥à¤šà¥‹ में neck control नहीं होता जिससे सिर उठाने पर पीछे लटक जाता हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को चोट लग सके या बचà¥à¤šà¤¾ निगल सके à¤à¤¸à¥€ कोई चीज बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पास न रखे।
अगर डायपर का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करते है तो हमेशा अचà¥à¤›à¥‡ डायपर का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करे और 10 घंटे से अधिक कोई डायपर न रखे।
6 महीने से बड़ों बचà¥à¤šà¥‹ को पानी पिलाते है तो हमेशा सà¥à¤µà¤šà¥à¤› पानी ही पिलाये।
सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ - मां को सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ का पूरा खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखना चाहिठताकि बचà¥à¤šà¤¾ गंदगी से संकà¥à¤°à¤®à¤£ की चपेट में ना आà¤à¤‚। गदà¥à¤¦à¥‡ और चादर साफ होने चाहिà¤à¥¤ बचà¥à¤šà¥‡ और मां के कपड़े à¤à¥€ अचà¥à¤›à¥‡ से धà¥à¤²à¥‡ हà¥à¤ होने चाहिà¤à¥¤ बचà¥à¤šà¥‡ और मां को रोज नहाना चाहिà¤à¥¤ मां के नाखूनों में मैल जमा नहीं होना चाहिà¤à¥¤ मां को अपने संपूरà¥à¤£ शरीर की सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ की खास देखरेख रखनी चाहिà¤à¥¤
मालिश - बचà¥à¤šà¥‡ की मालिश करना फायदेमंद होता है। यह वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• रूप से सही माना जाता है। मालिश हलà¥à¤•े हाथ से करनी चाहिà¤à¥¤ मालिश दोपहर के समय करना चाहिठताकि बचà¥à¤šà¥‡ को ठंड ना लगे।
काजल - बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की आंखों में काजल लगाया जाता है। यह माना जाता कि इससे बचà¥à¤šà¥‡ की आंख बड़ी होती है। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को आंख में काजल नहीं लगाना चाहिठयह नà¥à¤•सानदायक हो सकता है।
बचà¥à¤šà¥‹ में उलटी या दसà¥à¤¤ लगने पर तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° की राय लेनी चाहिà¤à¥¤ घरेलॠनà¥à¤¸à¥à¤–े आजमाने की जगह उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° को बताये। उलटी, बà¥à¤–ार और दसà¥à¤¤ के कारण बचà¥à¤šà¥‡ की तबियत जलà¥à¤¦ सीरियस हो सकती हैं। बचà¥à¤šà¥‹ में बीमारी के किसी à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ को हलके में लेने की गलती नहीं करनी चाहिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‹ को कà¥à¤¯à¤¾ कपडे पहनाये ?
गरà¥à¤®à¥€ का मौसम हो तो नवजात को कॉटन के ढीले कपड़े पहनाने चाहिà¤à¥¤ उसका पूरा शरीर कपड़े से ढका होना चाहिठताकि मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ से बचाव हो सके। गरà¥à¤®à¥€ में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को उनà¥à¤¹à¥€ कपड़े से गरà¥à¤®à¥€ होती है। मौसम में ठंडक होने पर ही उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ कपड़े पहनाà¤à¥¤ ठंड के मौसम में उनà¥à¤¹à¥€ कपड़े पहनाठलेकिन अंदर पतला नरम कॉटन कपड़ा जरूर पहनाना है। बचà¥à¤šà¥‡ को शरीर पूरी तरह ढका होना चाहिठताकि उसे ठंडा लगे या मचà¥à¤›à¤° ना काट पाà¤à¥¤
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